आज बहुत सारे परम्परागत तकनीक जो पहले देहातों मे रहने वाले लोगों के जीवन के अभिन्न अंग थे , लगभग लुप्त हो चुके हैं। जिनके सहारे लोग कड़ी मेहनत कर के अपनी रोजमरा के जरूरतों को पुरा करते थे, आने वाले दिनों मे ये वस्तुए देखनो को नही मिलेंगी. देहाती दुनियाँ की ये कोशीश है की उन तकनीकों, वस्तुओं को जिनसे हमारी संस्कृती जुड़ी हुई है। दुनियाँ के सामने पस्तुत करे।
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं इसे जाता कहते है, यानी हाथ से आटा तैयार करने की मशीन , पहले लोग इसी तकनीक का इस्तेमाल किया करते थे, रोज घर की महिलाएं इसमे गेहूं, ज्वर बाजरा इत्यादि की पिसाई इसी आटे के चकी से करती थी। इसमे ऊपर जो छोटा सा छेद है उसमे हाथ से गेहूं डाला जाता था, और दो महिलाएं लकड़ी के इस हँडल को पकड़ कर इसे घुमाती थी और इस तरह नीचे गेहूं आटा बनकर गिरता था। और लगभग रोज का राशन इससे तरह तैयार किया जाता था।आज की तरह आटे की चकी नही थी उस समय.
Tuesday, November 17, 2009
लुप्त होते परम्परागत तकनीक (wheat मशीन)
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Thursday, November 12, 2009
हिन्दी महीने बनाम इंग्लिश महीने
जिस तरह जनवरी अंगरेजी का पहला महीना है, उसी तरह हिन्दी महीनो में चैत वर्ष का पहला महीना होता है ।
हम इसे कुछ इस तरह से समझ सकते हैं।
March-April- चैत
April-May- वैसाख
May-june - ज्येष्ठ
June-July - आषाढ
July-August - सावन
August- september - भाद्रपद (भादो)
september- october - अश्विन (कुवार)
October-November - कार्तिक
November-December - मार्गशीर्ष (अगहन)
December-January - पौष (पुस)
January-february - माघ
February-March- फाल्गुन
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Monday, November 9, 2009
छत महा पर्व - एक महान आस्था का प्रतीक
बिहार और उतर भारत में विशेष रूप से मनाया जाने वाला छठ एक महा पर्व के रूप में विख्यात है। अब तो यह पर्व देश के अन्य कई प्रान्तों मे भी धूम धाम से मनाया जाता है।
इस पर्व मे २ दिनों तक निर्जला उपवास करते हुवे अस्ताचल सूर्य एवं दुसरे दिन उगते हुवे सूर्य की आराधना की जाती है। पवित्र तालाबों एवं नदियों के किनारे लाखों के संख्या मे उपस्थित होकर श्र्रधालु भग्वान भास्कर की पूजा करते है और सारा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
४ दिनों तक चलने यह के ६ दीपावली के 6 दिन बाद मार्गशीर्ष (अगहन) महीने के षष्ठी को मनाया जाता है।
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Thursday, October 1, 2009
Jai Mata Dee



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